Autobiography of subhash chandra bose in hindi. Subhash Chandra Bose Biography in Hindi Language 2018-12-27

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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस पर निबन्ध

autobiography of subhash chandra bose in hindi

मैं आप सबसे एक चीज मांगता हूं और वह है खून. जिसे सुनते ही वह अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली और तुरंत ही भारत लौट आए थे. पास किया । उसके बाद वह भारतीय नागरिक सेवा की परीक्षा में बैठने के लिए लंदन गए और उस परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया । साथ ही साथ उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में एम. सुभाषचंद्र बोस युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत हैं. आज उनके जन्मदिन पर रंगून में दिए गए उनके ऐतिहासिक भाषण का स्मरण आवश्यक है. सुभाष चंद्र बोस Subhash Chandra Bose महात्मा गांधी Mahatma Gandhi के अहिंसा के विचारों से सहमत नहीं थे. Posted By Tushar Mondal on Tuesday, 24-Nov-2015-07:19 we need like this type of leader who is thinking about our country not himself Posted By anil kumar on Saturday, 03-Oct-2015-07:56 नेता जी महान थे Comment using facebook.

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Subhash Chandra Bose Biography In hindi

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आज भारतीय स्वतंत्रता के प्रमुख सेनानी नेता जी सुभाषचन्द्र बोस की 115वीं जयंती है. Give me blood and I shall give you freedom! अभिगमन तिथि 22 अक्टूबर 2013. यह बात आप जानते हैं कि महात्मा गांधी जी को राष्ट्रपिता भी कहा जाता है और सबसे पहले गाँधीजी को राष्ट्रपिता कह कर नेताजी ने ही संबोधित किया था. की उच्च परिक्षा पास करके बङी सरकारी नौकरी करेंगे और परिवार की समृद्धि एवं यश की रक्षा करेंगे किन्तु जिस समय वे विलायत में थे, उसी समय अंग्रेजी सरकार के अन्यायपूर्ण नियमों के विरुद्ध गाँधी जी ने सत्याग्रह संग्राम छेङ हुआ था। सरकार के साथ असहयोग करके उसका संचालन कठिन बनाना, इस संग्राम की अपील थी। गाँधी जी से प्रभावित होकर सुभाष अपनी प्रतिष्ठित नौकरी छोङकर असहयोग आंदोलन में शामिल हो गये। आई. अधिकारी थे। 2 1924 में कोलकत्ता महानगर पालिका के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में उनको इन्होंने चुना। पर इसी स्थान होकर और कौनसा भी सबुत न होकर अंग्रेज सरकार ने क्रांतीकारोयों के साथ सबंध रखा ये इल्जाम लगाकर उन्हें गिरफ्तार मंडाले के जेल में भेजा गया। 3 1927 में सुभाषचंद्र बोस और इन दो युवा नेताओं को कॉंग्रेस के महासचिव के रूप में चुना गया। इस चुनाव के वजह से देशके युवाओं में बड़ी चेतना बढ़ी। 4 सुभाषचंद्र बोस इन्होंने समझौते के स्वातंत्र के अलावा पुरे स्वातंत्र की मांग कॉंग्रेस ने ब्रिटिशों से करनी चाहिये। ऐसा आग्रह किया। 1929 के लाहोर अधिवेशन में कॉंग्रेस ने पूरा स्वातंत्र का संकल्प पारित किया। ये संकल्प पारित होने में सुभाषचंद्र बोस इन्होंने बहोत प्रयास किये। 5 1938 में सुभाषचंद्र बोस हरिपुरा कॉंग्रेस अधिवेशन के अध्यक्ष बने। 6 1939 में त्रिपुरा यहा हुये कॉंग्रेस के अधिवेशन में वो गांधीजी के उमेदवार डॉ.

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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस पर निबन्ध

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अभिगमन तिथि 18 जनवरी 2014. सुभाष चंद्र Subhash Chandra अपना इलाज कराने विएना गए हुए थे. आजाद हिंद फौज या इंडियन नेशनल आर्मी की स्थापना वर्ष 1942 में हुई थी. दुश्मन ने हमारा जो खून बहाया है, उसका बदला सिर्फ खून से ही चुकाया जा सकता है. मैं जानता हूँ कि ब्रिटिश सरकार भारत की स्वाधीनता की माँग कभी स्वीकार नहीं करेगी। मैं इस बात का कायल हो चुका हूँ कि यदि हमें आज़ादी चाहिये तो हमें खून के दरिया से गुजरने को तैयार रहना चाहिये। अगर मुझे उम्मीद होती कि आज़ादी पाने का एक और सुनहरा मौका अपनी जिन्दगी में हमें मिलेगा तो मैं शायद घर छोड़ता ही नहीं। मैंने जो कुछ किया है अपने देश के लिये किया है। विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने और भारत की स्वाधीनता के लक्ष्य के निकट पहुँचने के लिये किया है। भारत की स्वाधीनता की आखिरी लड़ाई शुरू हो चुकी है। आज़ाद हिन्द फौज़ के सैनिक भारत की भूमि पर सफलतापूर्वक लड़ रहे हैं। हे राष्ट्रपिता! इस सफर के दौरान वे लापता हो गए.


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नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जीवनी Biography Of Subhash Chandra Bose In Hindi

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So far, we have never observed the day as we don't believe that he died on August 18. परन्तु मैं ये जानता हूँ, अंत में विजय हमारी ही होगी! अभिगमन तिथि 15 अक्टूबर 2013. पाण्डेय,1,सचिन कमलवंशी,2,सद्गुरु जग्गी वासुदेव,1,सरदार वल्लभ भाई पटेल,3,सिंहासन बत्तीसी,33,सुभद्रा कुमारी चौहान,1,सूरदास,1,सूर्य कान्त त्रिपाठी निराला,1,हरिवंशराय बच्चन,6,हिंदी व्याकरण,1,A. की परीक्षा देने के अपने पिता के फैसले को मानने के अलावा अन्य कोई रास्ता नहीं था अतः भाग्य के भरोसे ये इंग्लैण्ड चले गये। भारत से इंग्लैण्ड जाते समय इनके पास आई. नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के जीवन से संबंधित विभिन्न जानकारी के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें:. इसके साथ ही बंगाल कांग्रेस Congress के सचिव भी चुने गए.

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तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा सुभाष चन्द्र Subhash Chandra जी को नेताजी के नाम से प्रसिद्ध सशक्त क्रान्ति द्वारा भारत India को स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से 21 अक्टूबर 1943 को आज़ाद हिन्द सरकार की स्थापना की और आज़ाद हिन्द फ़ौज का गठन किया गया था. उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत और देश की आजादी के लिए कई काम किए फिर उन्होंने वर्ष 1943 में जर्मनी Germany छोड़ दिया था. के सफल उम्मीदवारों में अपना नाम देखा। इन्होंने योग्यता सूची में चौथा स्थान प्राप्त किया था। आई. बोस द्वारा दिया गया जय हिन्द का नारा देश का राष्ट्रीय नारा बन गया. उसके बाद उनकी शिक्षा कलकत्ता के प्रेज़िडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज से हुई जिसके बाद वह भारतीय प्रशासनिक सेवा यानि इण्डियन सिविल सर्विस Civil Service की तैयारी के लिए उनके माता — पिता ने उन्होनें इंग्लैंड के केंब्रिज विश्वविद्यालय भेज दिया था. आज हम बात करेंगे इस ही महान व्यक्ति सुभाष चंद्र बोस Subhash Chandra Bose के बारे में जानेगें, उनके जीवन Life के कुछ दिलचस्प किस्से और अनसुनी बातें. नेताजी सुभाष चन्द्र का जन्म 23 जनवरी, 1897 में कटक उड़ीसा में हुआ । वह एक मध्यम वर्गीय परिवार से सम्बन्ध रखते थे । 1920 में वह उन गिने — चुने भारतीयों में से एक थे, जिन्होंने आई.

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सुभाष चंद्र बोस की जीवनी

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दूसरों को अच्छी लगने वाली बातें करना मुझे नहीं आता! वहां से वह जापान Japan पहुंचे, जापान Japan से वह सिंगापुर पहुंचे. सुभाष चंद्र Subhash Chandra के पिता जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वक़ील थे. इस दिन के बाद वे कभी किसी को दिखाई नहीं दिए. यथा सभंव नेता जी की मौत नही हूई थी 16 जनवरी 2014 गुरुवार को कलकत्ता हाई कोर्ट ने नेताजी के लापता होने के रहस्य से जुड़े खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की माँग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के लिये स्पेशल बेंच के गठन का आदेश दिया। आजाद हिंद सरकार के 75 साल पूर्ण होने पर इतिहास मे पहली बार साल 2018 मे ने किसी प्रधानमंत्री के रूप में 15 अगस्त के अलावा लाल किले पर तिरंगा फहराया। 11 देशो कि सरकार ने इस सरकार को मान्यता दी थी। सुभाष के पिता जानकीनाथ बोस का सन् 1905 का चित्र विकिमीडिया कॉमंस से नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी सन् 1897 को के शहर में हिन्दू परिवार में हुआ था । उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माँ का नाम प्रभावती था। जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वकील थे। पहले वे सरकारी थे मगर बाद में उन्होंने निजी प्रैक्टिस शुरू कर दी थी। उन्होंने कटक की महापालिका में लम्बे समय तक काम किया था और वे के सदस्य भी रहे थे। अंग्रेज़ सरकार ने उन्हें रायबहादुर का खिताब दिया था। प्रभावती देवी के पिता का नाम गंगानारायण दत्त था। दत्त परिवार को का एक कुलीन कायस्थ परिवार माना जाता था। प्रभावती और जानकीनाथ बोस की कुल मिलाकर 14 सन्तानें थी जिसमें 6 बेटियाँ और 8 बेटे थे। सुभाष उनकी नौवीं सन्तान और पाँचवें बेटे थे। अपने सभी भाइयों में से सुभाष को सबसे अधिक लगाव शरद चन्द्र से था। शरदबाबू प्रभावती और जानकीनाथ के दूसरे बेटे थे। सुभाष उन्हें मेजदा कहते थे। शरदबाबू की पत्नी का नाम विभावती था। सुभाष का उन दिनों का चित्र जब वे सन् 1920 में इंग्लैण्ड आईसीएस करने गये हुए थे कटक के प्रोटेस्टेण्ट यूरोपियन स्कूल से प्राइमरी शिक्षा पूर्ण कर 1909 में उन्होंने रेवेनशा कॉलेजियेट स्कूल में दाखिला लिया। कॉलेज के प्रिन्सिपल बेनीमाधव दास के व्यक्तित्व का सुभाष के मन पर अच्छा प्रभाव पड़ा। मात्र पन्द्रह वर्ष की आयु में सुभाष ने विवेकानन्द साहित्य का पूर्ण अध्ययन कर लिया था। 1915 में उन्होंने इण्टरमीडियेट की परीक्षा बीमार होने के बावजूद द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण की। 1916 में जब वे दर्शनशास्त्र ऑनर्स में बीए के छात्र थे किसी बात पर प्रेसीडेंसी कॉलेज के अध्यापकों और छात्रों के बीच झगड़ा हो गया सुभाष ने छात्रों का नेतृत्व सम्हाला जिसके कारण उन्हें प्रेसीडेंसी कॉलेज से एक साल के लिये निकाल दिया गया और परीक्षा देने पर प्रतिबन्ध भी लगा दिया। 49वीं बंगाल रेजीमेण्ट में भर्ती के लिये उन्होंने परीक्षा दी किन्तु आँखें खराब होने के कारण उन्हें सेना के लिये अयोग्य घोषित कर दिया गया। किसी प्रकार स्कॉटिश चर्च कॉलेज में उन्होंने प्रवेश तो ले लिया किन्तु मन सेना में ही जाने को कह रहा था। खाली समय का उपयोग करने के लिये उन्होंने टेरीटोरियल आर्मी की परीक्षा दी और फोर्ट विलियम सेनालय में रँगरूट के रूप में प्रवेश पा गये। फिर ख्याल आया कि कहीं इण्टरमीडियेट की तरह बीए में भी कम नम्बर न आ जायें सुभाष ने खूब मन लगाकर पढ़ाई की और 1919 में बीए ऑनर्स की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। में उनका दूसरा स्थान था। पिता की इच्छा थी कि सुभाष आईसीएस बनें किन्तु उनकी आयु को देखते हुए केवल एक ही बार में यह परीक्षा पास करनी थी। उन्होंने पिता से चौबीस घण्टे का समय यह सोचने के लिये माँगा ताकि वे परीक्षा देने या न देने पर कोई अन्तिम निर्णय ले सकें। सारी रात इसी असमंजस में वह जागते रहे कि क्या किया जाये। आखिर उन्होंने परीक्षा देने का फैसला किया और 15 सितम्बर 1919 को इंग्लैण्ड चले गये। परीक्षा की तैयारी के लिये लन्दन के किसी स्कूल में दाखिला न मिलने पर सुभाष ने किसी तरह किट्स विलियम हाल में मानसिक एवं नैतिक विज्ञान की ट्राइपास ऑनर्स की परीक्षा का अध्ययन करने हेतु उन्हें प्रवेश मिल गया। इससे उनके रहने व खाने की समस्या हल हो गयी। हाल में एडमीशन लेना तो बहाना था असली मकसद तो आईसीएस में पास होकर दिखाना था। सो उन्होंने 1920 में वरीयता सूची में चौथा स्थान प्राप्त करते हुए पास कर ली। इसके बाद सुभाष ने अपने बड़े भाई को पत्र लिखकर उनकी राय जाननी चाही कि उनके दिलो-दिमाग पर तो और महर्षि के आदर्शों ने कब्जा कर रक्खा है ऐसे में आईसीएस बनकर वह अंग्रेजों की गुलामी कैसे कर पायेंगे? भारत को आजाद कराने में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की भूमिका काफी अहम थी. Pandey,1,Sachin Tendulkar,1,SamVeda,1,Sanskrit Shlok,77,Sant Kabeer,13,Saraswati Vandana,1,Sardar Vallabh Bhai Patel,1,Sardar Vallabhbhai Patel,3,Sayings and Proverbs,3,Scientist,1,Self Development,25,Self Forgiveness,2,Self-Confidence,3,Self-Help Hindi Articles,42,Shashikant Sharma,1,Shiv Khera,1,Shivmangal Singh Suman,2,Shrimad Bhagwat Geeta,19,Singhasan Battisi,33,Smartphone Etiquette,1,Social Articles,28,Social Networking,2,Socrates,6,Soordas,1,Spiritual Wisdom,1,Sports,1,Sri Ramcharitmanas,1,Sri Sri Ravi Shankar,1,Steve Jobs,1,Strength,2,Subhadra Kumari Chauhan,1,Subhash Chandra Bose,4,Subhashit,35,Subhashitani,36,Success Quotes,1,Success Tips,1,Surya Kant Tripathy Nirala,1,Suvichar,3,Swachha Bharat Abhiyan,1,Swami Dayananda,1,Swami Dayananda Saraswati,1,Swami Ram Tirtha,1,Swami Ramdev,10,Swami Vivekananda,23,T.

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Netaji Subhash Chandra Bose Hindi Essay नेताजी सुभाषचन्द्र बोस

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कटक, मृत्यु दिनांक 18 अगस्त, 1945. ये जानकारी नहीं देते लेकिन ये बहुत रोचक है नेताजी जब ऑस्ट्रिया में सन् 1934 में अपना चिकित्सा करवाने ठहरे हुए थे। तब उन्होंने अपने जीवनी पर एक पुस्तक लिखने के लिए एक अंग्रेजी टाईपिस्त की आवश्यकता पड़ी उस समय उनके दोस्त ने उनको एक एमिली शेंकल नाम की एक ऑस्ट्रियन लड़की से परिचय करवारा। एमिली के पिता एक पशु डाक्टर थे। सुभाष को एमिली की और आकर्षित हुए और एमिली भी सुभाष से काफी प्रेरीत हुई उनकी जीवनी जानकर। इसी कारण दोनों प्रेम हो गया। लेकिन जर्मनी के कानून को बड़े ही सख्त थे जिनका पालन करना अनिवार्य था। कानूनों के कारण सन् 1942 में गास्टिन नाम के स्थान पर हिन्दू रिती-रिवाज़ से विवाह रचा दिया। एमिली ने एक पुत्री को वियेना नाम के शहर में जन्म दिया। जब सुभाष से उसे पहली बार देखा तो वह सिर्फ 4 सप्ताह की थी। पुत्री का नाम अनिता बोस रखा गया। नेताजी की मृत्यु एक राज़ Secret Files of Netaji Bose Death उनकी मृत्यु आज की एक पहेली बनी हुई है। लेकिन तथ्य और जो आंकडें जो 99 हिन्दी को प्राप्त हुए उनमें जब नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने जापान की हार के बाद रूस से सहायता मॉंगने के लिए 18 अगस्त 1945 को हवाई जहाज से मंचूरिया की तरफ रवाना हूए, तो इस सफर के दौरान उनके लापता होने की खबरें ही है। उसके बाद से उनको किसी ने नहीं देखा ना ही वे कई पर दिखाई दिए। 23 अगस्त 1945 को टोकियो के रेडियों स्टेशन के यह सुचना दी गई की नेताजी एक बड़े विमान से पहूँच रहे थे ताइहोकू जापान का एक हवाई अड्डा के पास विमान क्षतिग्रस्त हो गया साथ ही विमान में मौजूद जापान के जनरल पाइलेट कुछ और अन्य लोग भी मारे गए! उनमें साहस और बुद्धि दोनों का मेल था. लक्ष्मी स्वामीनाथन को सौंपी गयी। सिंगापुर में अपनी सेना को सुदृढ़ करने के बाद नेताजी ने वर्मा म्यांमार के लिये कूच किया और जनवरी 1944 को वर्मा में आई. सुभाषचन्द्र बोस भारतीय इतिहास के ऐसे युग पुरुष हैं जिन्होंने आजादी की लड़ाई को एक नया मोड़ दिया था. प्रथम वर्ष के कुछ छात्र शोर कर रहे थे, लेक्चर में बाधा उपस्थित करने के जुर्म में प्रोफेसर ने पहली लाइन में लगे छात्रों को निकाल कर पीट दिया था। सुभाष चन्द्र अपनी क्लास के प्रतिनिधि थे। इन्होंने छात्रों के अपमान करने की इस घटना की सूचना अपने प्रधानाचार्य को दी। अगले दिन, इस घटना के विरोध में छात्रों द्वारा कॉलेज में सामूहिक हड़ताल का आयोजन किया गया, जिसका नेतृत्व सुभाष चन्द्र बोस ने किया। ये कॉलेज के इतिहास में पहली बार था जब छात्रों ने इस प्रकार की हड़ताल की थी। हर तरफ इस घटना की चर्चा हो रही थी। मामला अधिक न बढ़ जाये इसलिये अन्य शिक्षकों और प्रबंध समिति की मध्यस्था से उस समय तो मामला शान्त हो गया, लेकिन एक महीने बाद उसी प्रोफेसर ने दुबारा इनके एक सहपाठी को पीट दिया जिस पर कॉलेजों के कुछ छात्रों ने कानून को अपने हाथों में लिया जिसका परिणाम ये हुआ कि छात्रों ने प्रोफेसर को बहुत बुरी तरह पीटा। समाचार पत्रों से लेकर सरकारी दफ्तरों तक सभी में इस घटना ने हलचल मचा दी। छात्रों पर ये गलत आरोप लगाया गया कि प्रो. करने के बाद सुभाष चन्द्र बोस का झुकाव प्रयोगात्मक मनोविज्ञान की ओर हो गया। उन्होंने महसूस किया कि उनके जीवन की समस्याओं के समाधान के लिये दर्शनशास्त्र उपयुक्त नहीं है। दर्शनशास्त्र से उनका मोह टूट चुका था अतः वो मनौविज्ञान से एम.


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Netaji Subhash Chandra Bose Biography in Hindi

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अभिगमन तिथि २३ जनवरी २०१८. करना चाहते थे। इनके पिता जानकी नाथ कलकत्ता आये हुये थे और इनके बड़े भाई शरत् चन्द्र के पास रुके हुये थे। एक शाम इनके पिता ने इन्हें बुलाया और कहा कि क्या वो आई. लेकिन उनका शव नहीं मिल पाया था. जिसे अपने प्राणों का मोह अपने देश की आजादी से ज्यादा न हो और जो आजादी के लिए सर्वस्व त्याग करने के लिए तैयार हो. पिता शहर के मशहूर वकील थे. दास देशबन्धु से मिलने के लिये कलकत्ता चले गये। पर इनकी मुलाकात देशबन्धु से नहीं हो पायी क्योंकि वो दौरे पर गये हुये थे। कुछ समय इंतजार करने के बाद इनकी भेंट दास से हुई जो बहुत हद तक निर्णायक भी रही। इन्होंने देशबन्धु जी से मुलाकात करके महसूस किया कि दास जानते हैं कि वो क्या करने जा रहें हैं और इसे प्राप्त करने के लिये कौन कौन सी रणनीतियों को अपनाने से सफलता मिलेगी। दास अपने लक्ष्य की उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये अपना सब कुछ त्याग करने के लिये तैयार थे, जिसके कारण वो दूसरों को भी सर्वस्व त्याग के लिये मांग कर सकते थे। सुभाष चन्द्र बोस देशबन्धु चितरंजन दास से मिलकर बहुत प्रभावित हुये। उनसे मिलकर बोस को ऐसा लगा कि अपने जीवन के उद्देश्य प्राप्ति के रास्ते के साथ-साथ गुरु भी प्राप्त कर लिया, जिसका ये जीवन भर अनुसरण कर सकेंगे। 1921 में देश के कोने कोने में तिहरे बहिष्कार की लहर थी। वकील न्यायालाय की प्रक्रिया में भाग न लेकर न्यायिक व्यवस्था का बहिष्कार कर रहे थे, छात्रों ने विद्यालयों में जाना छोड़ दिया, कांग्रेसी नेताओं ने विधान मंडल की प्रक्रिया में भाग लेना बन्द कर दिया। लोग इसमें बढ़-चढ़ कर भाग ले रहे थे। देशवासियों में राष्ट्र प्रेम की भावना उमड़ रही थी। ऐसे समय में देशबन्धु ने अपने नये युवा सहयोगी को तहे दिल से अपनाया और उन्हें बंगाल प्रान्त की कांग्रेस कमेटी तथा राष्ट्रीय सेवा दल का प्रचार प्रधान बनाने के साथ ही नये खुले नेशनल कॉलेज का प्रिंसीपल भी नियुक्त कर दिया। अपनी योग्यता और लगन से इतने सारे दायित्वों को कुशलता पूर्वक निभाकर बोस ने सभी को प्रभावित कर दिया। नवम्बर 1921 में ब्रिटिश राजसिंहासन के वारिस प्रिंस ऑफ वेल्स की भारत आने की घोषणा की गयी। कांग्रेस ने प्रिंस के बम्बई में उतरने के दिन सम्पूर्ण हड़ताल का आयोजन किया। कलकत्ता में भी अन्य नगरों की तरह अवसर के अनुकूल प्रतिक्रिया हुई। ऐसा लगने लगा था कि जैसे सुभाष चन्द्र के नेतृत्व कांग्रेस के स्वंय सेवकों ने ही सारे शहर को सम्भाल लिया हो। सुभाष चन्द्र बोस का आन्दोलन के मुखिया के रुप में चयन और गिरफ्तारी जब ब्रिटिश सरकार ने प्रिंस के आने की घोषणा की तो सारे देश में जगह-जगह कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा हड़तालों और बन्द का आयोजन किया गया, जिससे सरकार ने कांग्रेस सरकार को ही गैरकानूनी घोषित कर दिया। इस बात ने आग में घी डालने का कार्य किया। प्रदेश की कांग्रेस समिति ने सारे अधिकार अपने अध्यक्ष सी. आनर्स दर्शन-शास्त्र करते समय सुभाष चन्द्र बोस के जीवन में एक घटना घटी। इस घटना ने इनकी विचारधारा को एक नया मोड़ दिया। ये बी.

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Netaji Subhash Chandra Bose Biography In Hindi सुभाष चंद्र बोस इतिहास

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अभिगमन तिथि 23 नवम्बर 2013. पृ॰ 510 से 511 तक. नेताजी सुभाष चंद्र Subhash Chandra हिटलर से मिले. There is circumstantial evidence to prove that he was in Russia after that date in 1945. की परीक्षा का परिणाम देखने के बाद सुभाष चन्द्र बोस को पास होने की खुशी हुई क्योंकि ये अब अपने देश भारत वापस लौट सकते थे। लेकिन इस परीक्षा के पास होते ही अब एक विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न हो गयी। ये स्वामी विवोकानंद और रामकृष्ण के आदर्शों को मानने वाले थे ऐसी स्थिति में इस नौकरी को करना अपने आदर्शों के खिलाफ समझते थे। इस विरोधाभास की स्थिति में बोस ने अपने बड़े भाई शरत् चन्द्र को पत्र लिखकर अपने नौकरी न करने के फैसले के बारे में बताया और उन्हें खत लिखने के 3 हफ्ते के बाद 22 अप्रैल 1921 को बोस ने सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फार इंडिया ई.

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